सावन-भादों का महीना था। बादलों से अटकर काला पड़ गया था आकाश। गहन निःश्वास सी पुरुवा हवा हा-हाकार करती हुई किले में दानव की तरह खड़े पेड़ों और फैली हुई झाड़ियों को कँपा दे रही थी। घोर निस्तब्ध रात्रि। निबिड़ रात्रि का गहन अन्धकार। यदा-कदा अभिशप्त किले में निवास करने वाली प्रेतात्माओं की एक साथ हँसने और रोने की भयानक तीखी आवाजों से किले का निस्तब्ध वातावरण बार-बार काँप उठता था और उसी के साथ मेरा मन भी दहशत से भर जाता था। सहसा मेरी दृष्टि स्याह आकाश की ओर उठ गयी। क्यों उठ गयी थी? नहीं जानता। मगर दृष्टि उठते ही आकाश के श्याम पटल पर बादलों के बीच मैंने जो कुछ देखा उसने मुझे एकबारगी रोमान्चित कर दिया।

गहरे अन्धकार में डूबे हुए मेघाच्छन्न आकाश में मैंने देखा एक सुन्दर स्त्री तीव्र गति से उड़ती हुई पूरब से उत्तर दिशा की ओर चली जा रही थी। उसके काले बाल बिखर कर हवा में लहरा रहे थे। उस स्त्री की गति कभी तीव्र हो जाती तो कभी मन्द। सबसे आश्चर्य की बात थी कि मैं उस घोर अन्धकार में भी स्पष्ट देख रहा था उस आकाशचारिणी योगिनी को। निश्चय ही वह कोई उच्चकोटि की योगसाधिका थी। देखते ही देखते वह निविड़ अन्धकार के आगोश में समा गयी।

Akashcharini

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  • Title Akashcharini
    (The Flying Priestess)
    Author Shri Arun Kumar Sharma
    Language Hindi
    Publication Year: First Edition - 2007
    Price Rs. 225.00 (free shipping within india)
    ISBN 9AGAH
    Binding Type Hard Bound
    Pages x + 278 Pages
    Size 22.5 cm x 14.5 cm

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