मैंने कहा - सुना है कि योगीगण अपने सामर्थ्य बल से किसी को भी अपनी सिद्धि का अनुभव करा सकते हैं। क्या यह संभव है?

मातुलीमाया बोली - हाँ, यह संभव है।

तो क्या आप मुझे भी बिना धड़कन के जीवन का अनुभव करा सकेंगी?

क्यों नहीं। लेकिन इसके लिये आपको भी थोड़ा प्रयास करना होगा। आप पहले खूब जोर-जोर से श्वास खींचें और बाहर निकालें। फिर उसी क्रिया के समय अपने भ्रूमध्य में मन को एकाग्र करें।

मैंने वैसा ही किया। भ्रूमध्य पर मन को ले जाते ही चित्त अपने आप एकाग्र हो गया और उसी समय मातुलीमाया की उँगली को अपनी नाभि में धँसने का अनुभव किया मैंने। थोड़ी देर बाद मुझे लगा जैसे मेरे हृदय की धड़कन रुक गयी है और श्वास-प्रश्वास की गति भी। मैं पूर्ण रूप से जीवित था। पूरी तरह होश में था और पूरी तरह चैतन्य भी। मगर विश्वास करें मेरे हृदय की धड़कन बिल्कुल बन्द थी और श्वास-प्रश्वास की गति भी। मेरा सारा शरीर हल्का और प्रफुल्ल हो गया था। मस्तिष्क में भी एक विचित्र सी शीतलता छा गयी थी। अगर मैं उस अवस्था में सो जाता तो लोग मुझे निश्चित ही मृत समझते।

मातुलीमाया ने कहा - आप यहाँ जब तक रहेंगे इसी स्थिति में रहेंगे। आप पर देश्-काल का प्रभाव नहीं पड़ेगा। इन्द्रियों को किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मातुलीमाया का कहना बिल्कुल ठीक था। मैं जब तक उस पातालपुरी में था तब तक मुझे न भूख लगी और न प्यास लगी और न ही किसी प्रकार की आवश्यकता ही महसूस हुई। लेकिन जब एक दिन रहस्यमय ढंग से बाहर निकला तो आश्चर्य से भर गया मेरा मन। पूरे छः महीने रहा मैं उस रहस्यमय आश्रम में। मगर उन छः महीनों में न मेरे नाखून बढे थे, न बाल बढे थे और न तो मेरे कपड़े ही मैले हुए थे। लेकिन बाहर निकलते ही भूख-प्यास से व्याकुल हो उठा मैं। शरीर और कपड़े बहुत गन्दे हो गये थे। नाखून और बाल भी बड़े हो गये थे। छः महीने तक लापता रहने के कारण किसी ने सोचा की मैं मर गया कहीं बाहर जाकर। किसी ने समझा कि मैं साधु होकर कहीं चला गया।

सभी लोगों ने पूछा - कहाँ था अब तक मैं? क्या करता था? मेरी ऐसी हालत कैसे हो गयी?

क्या उत्तर देता मैं। अगर सही बात बतलाता तो कौन करता मेरी बातों पर विश्वास।

Maaran Paatra

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  • Title Maaran Paatra
    Author Shri Arun Kumar Sharma
    Language Hindi
    Publication Year: Third Edition - 2008
    Price Rs. 500.00 (free shipping within india)
    ISBN 9788190679633
    Binding Type Hard Bound
    Pages xvi + 60 + 572 Pages
    Size 22.0 cm x 14.0 cm

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