मृत्यु के 'क्षण' केवल 'आत्मा' का बहिर्गमन होता है। उसके पूर्व एक-एक करके पाँच प्रकार के प्राण बाहर निकलकर उसी प्रकार सूक्ष्म शरीर की रचना करते हैं, जिस प्रकार गर्भ में स्थूल शरीर का निर्माण क्रम से होता है। प्राणों की सहायता से सूक्ष्म शरीर की रचना पूर्ण होते ही अपने मूल वाहक धनन्जय प्राण के द्वारा 'आत्मा' बड़े वेग से निकलकर सूक्ष्म शरीर में प्रवेश कर जाती है। यह शरीर के जिस अंग से निकलती है, उसे खोलती, तोड़ती हुई जाती है। जो भयंकर पापी हैं उनकी आत्मा मूत्र या मल के मार्ग से, मध्यम श्रेणी के लोगों की आत्मा मुख से, जो पापी कम और पुण्यात्मा अधिक हैं उनकी आत्मा नेत्रों से और जो पूर्ण धर्मनिष्ठ, पुण्यात्मा अथवा योगी हैं उनकी आत्मा ब्रह्म रन्ध्र से निकलती है।

मृत्यु क्षण के पूर्व जिसके सूक्ष्म शरीर की रचना तुरन्त हुई रहती है उसे वासना शरीर यानि प्रेत शरीर धारण नहीं करना पड़ता। प्रेत योनि में भटकना नहीं पड़ता। मगर जिसके सूक्ष्म शरीर की रचना तुरन्त नहीं हुई रहती उसे सूक्ष्म शरीर की रचना होने तक प्रेत योनि मे रहना पड़ता है यानि वासना शरीर में।

प्रेत उस चेतना को कहते हैं जिसका शरीर तो छूट गया है लेकिन 'मन' नहीं छूटा। 'मन' सभी प्रकार की वासनाओं का भण्डार है और वे वासनाएँ शरीर के द्वारा ही तृप्त हो सकती हैं। किसी प्रिय का तन स्पर्श करना चाहता है लेकिन प्रेत स्पर्श नहीं कर सकता क्योंकि उसके पास हाथ नहीं हैं, त्वचा नहीं है। मन स्वाद लेना चाहता है किसी स्वादिष्ट वस्तु का लेकिन प्रेत के पास जिह्वा नहीं है। मन देखना, सुनना चाहता है पर उसके पास आँख, कान नहीं हैं। प्रेत का यही कष्ट है कि उसके पास उपकरण नहीं है जिससे वह अपनी वासना को पूर्ण कर सके। वासना तो पूरी की पूरी है उसके पास, लेकिन साधन सब खो गये हैं। वासना अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। इसलिये प्रेतात्माएँ अच्छी भी होती हैं और बुरी भी।

Maranottar Jeevan Ka Rahasya (Secrets of Life After Death)

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  • Title Maranottar Jeevan Ka Rahasya
    (Secrets of Life After Death)
    Author Shri Arun Kumar Sharma
    Language Hindi
    Publication Year: Second Edition - 2007
    Price Rs. 300.00 (free shipping within india)
    ISBN 9AGMJKRH
    Binding Type Hard Bound
    Pages xiv + 53 + 384 Pages
    Size 22.5 cm x 14.0 cm

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