लामावर्तन योग, तन्त्र, मन्त्र, ज्योतिष और आयुर्वेद के निष्णात विद्वान तो थे ही इसके अतिरिक्त आध्यात्म शास्त्र पर भी पूर्ण अधिकार था उनका इसमें सन्देह नहीं।

एक दिन प्रसंगवश मठ के गुप्त प्रकोष्ठ की चर्चा करते हुए उसे देखने की इच्छा प्रकट की मैंने उनसे। पहले तो उन्होंने यह कहकर टालने का प्रयत्न किया कि बाहरी व्यक्ति को उस प्रकोष्ठ में प्रवेश की आज्ञा नहीं है। लेकिन मेरे बार-बार अनुरोध करने पर अन्ततः दिखाने के लिये तैयार हो गये। तलघर जैसा था वह गुप्त प्रकोष्ठ। नीचे जाने के लिये पत्थर की सीढीयाँ थी धूल से अटी पड़ी। लगा जैसे वर्षों से कोई वहाँ आया गया न हो। पूरी तरह अन्धकार मे डूबा हुआ था सारा प्रकोष्ठ। प्रकाश की व्यवस्था हुई। अपने पीछे आने का संकेत कर धीरे-धीरे सीढीयाँ उतरने लगे लामावर्तन। मैंने भी उनका अनुशरण किया। सीढीयाँ उतरने के बाद एक काफी लम्बा-चौड़ा हालनुमा कमरा मिला मुझे। जिसके मध्य में पत्थर की कई ऊँची-ऊँची वेदियाँ बनी हुई थी। जिनमें कुछ को छोड़कर अन्य सभी पर एक-एक लामा योगी पद्मासन की मुद्रा में समाधिस्थ बैठे हुए थे। जिनके शरीर पर मांस नाम मात्र का नहीं था। सभी हड्डियों के ढाँचे मात्र थे। सारा शरीर सनसना उठा मेरा एकबारगी। लगा जैसे किसी कब्र में आ गया हूँ मैं। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि उस प्रकोष्ठ के रहस्यमय वातावरण में एक विचित्र प्रकार की सुगन्ध बिखरी हुई थी जो मन ओर प्राण को सम्मोहित सी कर रही थी।

ध्यानपूर्वक देख रहा था मैं उन अस्थिमय लामा योगियों को, तभी लामावर्तन का गम्भीर स्वर सुनाई पड़ा मुझे। ये सभी योगी मृतसमाधि में लीन हैं सम्भवतः दो ढाई सौ वर्षों से।

चौंक पड़ा मैं। सिर घुमाकर आश्चर्य से लामावर्तन की ओर देखा।

लामावर्तन आगे बोले -- आप जिन-जिन योगियों को यहाँ मृत समाधि की अवस्था में देख रहे हैं वे अपने आत्मशरीर द्वारा पिछले दो सौ पचास वर्षों से ब्रह्माण्ड भ्रमण कर रहे हैं। जिनका एकमात्र उद्देश्य है - जिस सीमा तक उप्लब्ध हो सके उस सीमा तक ब्रह्माण्ड के रहस्यों से परिचित होना, लोक-लोकान्तरों का ज्ञान प्राप्त करना और उन दोनों के आश्रय से आध्यात्मिक उन्नति करना। उनका उद्देश्य जब पूरा हो जायेगा और भ्रमण की अवधि भी पूरी हो जायेगी तो पुनः अपने-अपने पार्थिव शरीर में वे वापस लौटकर जीवित हो उठेंगे।

Teesara Netra - Part 1 (The Third Eye - Part 1)

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  • Title Teesara Netra - Part 1
    (The Third Eye - Part 1)
    Author Shri Arun Kumar Sharma
    Language Hindi
    Publication Year: Re-print - 2008
    Price Rs. 300.00 (free shipping within india)
    ISBN 9788190679619
    Binding Type Hard Bound
    Pages xx + 340 Pages
    Size 22.5 cm x 14.0 cm

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