बड़ी तन्मयता और बड़े ध्यान से लामा युत्सुंग मेरी बात सुनते रहे। सब कुछ सुनने के बाद उनकी मुख-मुद्रा गम्भीर हो गयी। काफी देर तक न जाने क्या सोचते रहे वह आँखे मूँदकर फिर सहज स्वर मे बोले, निश्चय ही आप किसी अलौकिक शक्ति की प्रेरणा के वशीभूत होकर संग्रीला घाटी पहुँच गये थे।

संग्रीला घाटी.... इसका नाम तो मैं पहली बार सुन रहा हूँ। चौँकते हुए मैंने कहा।

तिब्बत और अरुणाचल की सीमा पर स्थित है संग्रीला घाटी। युत्सुंग बोले, लेकिन व्यापक भू-हीनता और चतुर्थ आयाम से प्रभावित होने के कारण अभी तक अगम्य, अगोचर और रहस्यमयी बनी हुई है। यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ मुझे। कौतूहल भरे स्वर में मैंने कहा, आपकी चतुर्थ आयाम और भू-हीनता की बात मेरी समझ मे नहीं आयी। इनसे आपका तात्पर्य क्या है?

युत्सुंग सहज गम्भीर हो गये और फिर उसी मुद्रा में बोले - यह अत्यन्त जटिल विषय है शर्मा जी! चतुर्थ आयाम अथवा भू-हीनता के तथ्यगत सिद्धान्तों की ठीक-ठीक व्याख्या और विवेचन करना सभी के वश की बात नहीं है। पिछले पच्चीस साल से प्रयत्नशील हूँ मैं इस दिशा में। यदि स्वयं मैं संग्रीला घाटी के रहस्यमय प्रदेश में न गया होता तो इन दोनों विषयों पर कदापि व्यापक अनुसन्धान न कर पाता।

युत्सुंग ने बताया कि जिस प्रकार वायुमण्डल में कई स्थान "वायु-शून्य" होते हैं उसी प्रकार धरती पर भी ऐसे कई स्थान हैं जो "भू-हीन" हैं। ऐसे स्थान देश, काल और निमित्त से परे होते हैं। उनमें कोई भी वस्तु या प्राणी अनजाने में चला जाये तो तीन आयाम वाले इस जगत की दृष्टि में उसकी सत्ता अदृश्य अथवा लुप्त हो जाती है। लेकिन वहाँ उसका अस्तित्व बना रहता है। यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि भविष्य में कब उसका अस्तित्व इस जगत में प्रकट होगा या होगा भी के नहीं।

सबसे आश्चर्यजनक बात तो ये है कि वहाँ काल का प्रभाव नगण्य है और वहाँ मन, प्राण और विचार की शक्ति एक विशेष सीमा तक बढ जाती है।

Tibet Kee Veh Rahasyamayee Ghaati (The Mysterious Valley of Tibet)

₹250.00Price
  • Title Tibet Kee Veh Rahasyamayee Ghaati
    (The Mysterious Valley of Tibet)
    Author Shri Arun Kumar Sharma
    Language Hindi
    Publication Year: First Edition - 1999
    Price Rs. 250.00 (free shipping within india)
    ISBN 8171242308
    Binding Type Hard Bound
    Pages viii + 192 Pages
    Size 22.0 cm x 14.0 cm

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